Advanced International Journal of Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2584-0487

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वैश्वीकरण का हिंदी भाषा और साहित्य पर प्रभाव’

Author(s) डॉ. मंजू भट्ट
Country India
Abstract वर्तमान समय को वैश्वीकरण का युग कहा जाता है। संचार माध्यमों की क्रांतिकारी प्रगति, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार, इंटरनेट का प्रसार, आर्थिक उदारीकरण, मुक्त बाज़ार की नीतियाँ तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोगकृइन सभी ने विश्व को एक “ग्लोबल विलेज” के रूप में परिवर्तित कर दिया है। भाषा और साहित्य मानव संस्कृति के संवाहक होते हैं, इसलिए वे इन परिवर्तनों से अछूते नहीं रह सकते। हिंदी भाषा, जो भारत की सबसे बड़ी और विश्व की प्रमुख भाषाओं में शामिल है, वैश्वीकरण के प्रभाव से नई संभावनाएँ, व्यापकता और चुनौतियों का अनुभव कर रही है। हिंदी साहित्य भी आधुनिक परिस्थितियों के अनुसार अपने रूप, विषय, संवेदना और अभिव्यक्ति में महत्वपूर्ण परिवर्तन देख रहा है। वैश्वीकरण ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है। भारत की आर्थिक प्रगति, विदेशों में बसे भारतीयों की बढ़ती संख्या तथा बॉलीवुड, टीवी सीरियल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने हिंदी को विश्वभर में लोकप्रिय भाषा बना दिया है। वैश्वीकरण ने तकनीकी प्रगति को बढ़ावा दिया, जिससे हिंदी ने इंटरनेट, वेबसाइट, डाउनलोड, ईमेल, सॉफ्टवेयर, मार्केटिंग आदि जैसे शब्द सहजता से स्वीकार किए। वैश्विक रोजगार और शिक्षा अंग्रेज़ी प्रधान होने के कारण हिंदी में अंग्रेज़ी मिश्रण बढ़ा है। इससे भाषा आधुनिक तो लगती है, लेकिन इसकी शुद्धता प्रभावित होती है।
Keywords उदारीकरण, वैश्वीकरण, व्यापकता, सोशल मीडिया, चुनौतियां, आधुनिकीकरण
Discipline Other
Published In Volume 3, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-12-14
Cite This वैश्वीकरण का हिंदी भाषा और साहित्य पर प्रभाव’ - डॉ. मंजू भट्ट - AIJMR Volume 3, Issue 6, November-December 2025.

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