Plagiarism is checked by the leading plagiarism checker
Volume 4 Issue 1
January-February 2026
| Author(s) | डाॅ. मुरली सिंह ठाकुर |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | हिन्दी कविता के आधुनिक परिदृश्य में कुंवर नारायण का नाम एक ऐसे चिंतनशील कवि के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने जीवन, समाज, इतिहास और मनुष्य के अस्तित्व से जुड़े गहन प्रश्नों को अत्यंत संवेदनशील और बौद्धिक दृष्टि से देखा। उनकी कविताएँ केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक दार्शनिक खोज हैं- एक ऐसा विमर्श जो मानवीय करुणा, विवेक, और नैतिक चेतना को पुनस्र्थापित करता है। कुंवर नारायण का काव्य-संसार मनुष्य की आत्मा के भीतर झाँकने का आमंत्रण है। उनकी कविताओं में मानव अस्तित्व की जटिलता, संघर्ष और विवेक, तथा समाज के नैतिक द्वंद्व का गहन चित्रण मिलता है। उन्होंने अपने काव्य में यह बताया कि “मनुष्य” का अर्थ केवल जैविक प्राणी नहीं, बल्कि एक चेतन, संवेदनशील और चिंतनशील इकाई है जो समय और इतिहास से संवाद करती है। आधुनिक युग में जहाँ भौतिक प्रगति के साथ मानवीय मूल्य संकट में हैं, वहाँ कुंवर नारायण की कविताएँ एक नैतिक विकल्प प्रस्तुत करती हैं। उनकी रचनाओं में अतीत और वर्तमान का सामंजस्य है, जहाँ इतिहास की स्मृति और भविष्य की चिंता एक साथ चलती है। कवि ने ‘आत्मजयी’ जैसे महाकाव्यात्मक काव्य में जीवन और मृत्यु के दार्शनिक प्रश्नों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया, वहीं ‘कोई दूसरा नहीं’ और ‘वाजश्रवा के बहाने’ में उन्होंने मनुष्य की भीतरी यात्रा और सामाजिक आत्मालोचन का गहन विश्लेषण किया है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य कुंवर नारायण की कविताओं में निहित मानवीय संवेदनाओं और आधुनिक चिंतन की प्रकृति, अभिव्यक्ति एवं सामाजिक प्रासंगिकता का अध्ययन करना है। यह शोध पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें कवि के प्रमुख काव्य-संग्रहों के साथ समकालीन आलोचकों के विचारों का विश्लेषण किया गया है। |
| Keywords | कुंवर नारायण, मानवीय संवेदना, आधुनिक चिंतन, नैतिकता, अस्तित्वबोध। |
| Discipline | Other |
| Published In | Volume 3, Issue 6, November-December 2025 |
| Published On | 2025-12-14 |
| Cite This | कुंवर नारायण की कविताओं में मानवीय संवेदनाएँ और आधुनिक चिंतन - डाॅ. मुरली सिंह ठाकुर - AIJMR Volume 3, Issue 6, November-December 2025. |

E-ISSN 2584-0487All research papers published on this website are licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, and all rights belong to their respective authors/researchers.