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Volume 4 Issue 2
March-April 2026
| Author(s) | डॉ. अक्षय सुराणा |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली ऐतिहासिक रूप से बहुसांस्कृतिकता, भाषाई विविधता, धार्मिक सह-अस्तित्व और सामाजिक बहुलता का प्रतिनिधित्व करती रही है। विविध सामाजिक, क्षेत्रीय, जातीय, आर्थिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाले विद्यार्थी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को केवल ज्ञान-प्राप्ति के केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद, सहिष्णुता और समरसता के मंच के रूप में भी स्थापित करते हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा में बहुसांस्कृतिकता की अवधारणा, उसकी व्यवहारिक अभिव्यक्तियों तथा सामाजिक समरसता के निर्माण में उसकी भूमिका का विश्लेषण करना है। शोध में यह भी विवेचित किया गया है कि किस प्रकार पाठ्यक्रम संरचना, सह-पाठ्यचर्या गतिविधियाँ, संस्थागत नीतियाँ और शैक्षणिक परिवेश विविधताओं के प्रति संवेदनशीलता, समावेशन और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं। अध्ययन यह दर्शाता है कि बहुसांस्कृतिक दृष्टिकोण न केवल सामाजिक विभेदों को कम करने में सहायक है, बल्कि छात्रों में पारस्परिक सम्मान, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी विकसित करता है। साथ ही, वैश्वीकरण और नीतिगत परिवर्तनों के संदर्भ में उच्च शिक्षा की भूमिका को सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकीकरण के संदर्भ में पुनःपरिभाषित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। यह अध्ययन नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के लिए बहुसांस्कृतिक एवं समरसतामूलक उच्च शिक्षा के विकास हेतु उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। |
| Keywords | भारतीय उच्च शिक्षा, बहुसांस्कृतिकता, सामाजिक समरसता, समावेशी शिक्षा, सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय एकीकरण |
| Discipline | Other |
| Published In | Volume 4, Issue 1, January-February 2026 |
| Published On | 2026-02-15 |

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