Advanced International Journal of Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2584-0487   Impact Factor: 9.11

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पुनर्जागरण और आधुनिक यूरोपीय समाज का निर्माण

Author(s) आशा सुनारीवाल
Country India
Abstract 15वीं शताब्दी के यूरोप में एक भारी वैचारिक क्रांति का आगमन हुआ। थलीय मार्ग से भारत की ओर आने वाले मार्गों पर उस्मानी तुर्कों ने आधिपत्य स्थापित कर लिया। पूर्व और पश्चिम (भारत और रोमन साम्राज्य) के बीच विचारों और वस्तुओं का जो आदान-प्रदान शताब्दियों से हो रहा था, वह अचानक बंद हो गया। भारत के मसाले जो रोमन रसोई का जायका बढ़ाते थे, और भारत और चीन के विचार जो यूरोपीय बौद्धिक जगत की ज्ञान पिपासा शांत करते थे, दोनों बंद हो गए। फलतः इटली, स्पेन और पुर्तगाल के साहसिक नाविक भारत की खोज में निकल पड़े। चूंकि कुस्तुनतुनिया नगर में ढेर सारे यूरोपीय विद्वान अपनी ज्ञान की पोथियों को लेकर निवास कर रहे थे। उस्मानी तुर्कों द्वारा इस नगर पर कब्जा हो जाने के बाद ये लोग रोम, वेनिस, मिलान और जेनेवा की ओर चले गए और ज्ञान का वितरण और विश्लेषण भूमध्यसागरी देशों (इटली, स्पेन और पुर्तगात) में होने लगा। फलतः लोग इस प्राप्त ज्ञान के आलोक में जीव, जगत और धर्म पर विचार करने लगे। दूसरी ओर पोप के नेतृत्व में मुसलमानों से लड़े गए धर्म युद्ध में ईसाई देश हार गये। फलतः रोम के पोप और ईसाई धर्म की अजेयता का भ्रम टूट गया। लोग नवीन तर्काधारित ज्ञान पर जोर देने लगे। दांते, चौसर, मैकियावला और पेट्रार्क ने यूरोपीय बौद्धिक वर्ग को नये ढंग से सोचने को मजबूर किया। इस सोचने विचारे की प्रवृत्ति को विष्व इतिहास में पुनर्जागरण गया। इस यूरोपीय पुनर्जागरण ने इटली के समाज और राजनीति काच आधार को बदल दिया। जो सामाजिक और राजनीतिक चिंतन ईष्वर केद्रित हुआ करता था, वह अब लोक और लोग केन्द्रित हो गया। यह मान लिया गया है कि मनुष्य को कोई ‘डिवाइन एजेन्सी‘ नहीं प्रभावित करती है। मनुष्य अपना भाग्य विधाता स्वयं है। इस पुनर्जागरण के कारण मनुष्य के विचार में आस्था और विष्वास की जगह तर्क और वैज्ञानिक प्रेक्षण ने ले लिया।
Keywords वैचारिक क्रांति, पुनर्जागरण, मानवाधिकार, आंदोलन, समग्ररूपेण, अमेरीकी क्रांति, फ्रांसीसी क्रांति, ज्ञानोदय काल।
Discipline Other
Published In Volume 2, Issue 1, January-February 2024
Published On 2024-01-10

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