Advanced International Journal of Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2584-0487   Impact Factor: 9.11

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पर्यावरणीय राजनीति का उभरता विमर्श: बिहार राज्य के विशेष संदर्भ में

Author(s) विकाश कुमार विधाता
Country India
Abstract पर्यावरणीय राजनीति का उभरता विमर्श समकालीन वैश्विक और स्थानीय संदर्भ में लोकतंत्र, विकास और स्थिरता के अंतर्संबंध को रेखांकित करता है। बिहार राज्य, जो हिमालयी नदियों की बाढ़, गंगा प्रदूषण, सूखा, मिट्टी की क्षरण और जलवायु परिवर्तन की चरम घटनाओं से अत्यधिक प्रभावित है, इस विमर्श का एक महत्वपूर्ण केस स्टडी प्रस्तुत करता है। राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता उत्तर में नेपाल सीमा से आने वाली बाढ़, दक्षिण में सूखा प्रभावित क्षेत्र और गंगा बेसिन की स्थिति पर्यावरणीय मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में लाती है, हालांकि चुनावी राजनीति में ये अक्सर माध्यमिक रह जाते हैं। बिहार में पर्यावरणीय राजनीति का विमर्श मुख्य रूप से बाढ़ प्रबंधन, तटबंधों की राजनीति, जल जीवन हरयाली अभियान, जलवायु परिवर्तन पर बिहार राज्य कार्य योजना और गंगा सफाई जैसे कार्यक्रमों के इर्द-गिर्द घूमता है। नीतिश सरकार सरकार के शासन में जल संरक्षण, वनरोपण, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई, जो विकासात्मक राजनीति को पर्यावरणीय अनुकूलन से जोड़ती है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में मतदाता प्राथमिकताएं रोजगार, जाति और बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित रहती हैं, जिससे पर्यावरणीय मुद्दे प्रतिक्रियात्मक बने रहते हैं।
यह शोध उभरते विमर्श को जांचता है जिसमें पर्यावरण न्याय, सामुदायिक भागीदारी, संघर्ष और हरित अर्थव्यवस्था के अवसर शामिल हैं। बिहार की गरीबी, उच्च जनसंख्या घनत्व और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था पर्यावरणीय गिरावट को सामाजिक-आर्थिक असमानता से जोड़ती है। ग्लोबल क्लाइमेट चेंज फ्रेमवर्क और राष्ट्रीय नीतियों के साथ राज्य की पहलें संरेखित हैं, लेकिन क्रियान्वयन में चुनौतियां बनी हुई हैं।
Keywords पर्यावरणीय राजनीति, जल संरक्षण, वनरोपण, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा प्रबंधन इत्यादि
Discipline Other
Published In Volume 3, Issue 1, January-February 2025
Published On 2025-01-03

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