Advanced International Journal of Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2584-0487   Impact Factor: 9.11

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गुप्त साम्राज्य का प्रशासनिक ढांचा: केंद्रीयकरण, सामंतवाद की शुरुआत और प्रांतीय शासन

Author(s) राहुल कुमार
Country India
Abstract प्राचीन भारतीय इतिहास में गुप्त काल (4वीं से 6ठी शताब्दी ईस्वी) को सांस्कृतिक, आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से 'स्वर्ण युग' माना जाता है। मौर्य साम्राज्य के अत्यधिक केंद्रीकृत और नौकरशाही तंत्र के विपरीत, गुप्त साम्राज्य ने एक नए प्रशासनिक मॉडल की नींव रखी, जो विकेंद्रीकरण और शुरुआती सामंतवाद की विशेषताओं से युक्त था। प्रस्तुत शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य गुप्त साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है, जिसमें केंद्रीय प्रशासन, प्रांतीय एवं स्थानीय शासन संरचना, राजस्व व्यवस्था, न्याय प्रणाली और विशेष रूप से सामंतवाद के बीजारोपण की ऐतिहासिक प्रक्रिया का मूल्यांकन शामिल है।
अध्ययन में प्राथमिक साक्ष्यों (हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति, फ़ाहियान और ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत, मंदसौर एवं दामोदरपुर ताम्रपत्र अभिलेख तथा गुप्तकालीन स्वर्ण व रजत मुद्राएं) और द्वितीयक साक्ष्यों के त्रिकोणीयकरण का उपयोग किया गया है। शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि साम्राज्य का केंद्रीय ढांचा सम्राट के दैवीय अधिकारों पर आधारित था, परंतु व्यावहारिक स्तर पर शासन का वास्तविक संचालन प्रांतीय अधिकारियों (उपरिक) और स्थानीय स्वायत्त इकाइयों (विषयपति एवं नगर श्रेष्ठियों) द्वारा किया जाता था। इसके अतिरिक्त, भूमि अनुदान (अग्रहार) की परंपरा ने सामंती पदानुक्रम को जन्म दिया, जिसने अंततः साम्राज्य के पतन और क्षेत्रीय शक्तियों के अभ्युदय का मार्ग प्रशस्त किया। प्रस्तुत पत्र प्राचीन भारतीय प्रशासनिक रूपांतरण को समझने हेतु एक मानक संदर्भ ढांचा प्रस्तुत करता है।
Keywords गुप्त साम्राज्य, प्रशासनिक ढांचा, सामंतवाद, उपरिक एवं विषयपति, भुक्ति एवं विषय, अग्रहार, भूमि अनुदान, देवकुल
Discipline Arts
Published In Volume 4, Issue 4, July-August 2026
Published On 2026-08-13

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