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Volume 4 Issue 2
March-April 2026
| Author(s) | कांता कुमारी मीना |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | राजस्थान भारत का एक शुष्क एवं अर्ध-शुष्क राज्य है, जहाँ जल संकट एक गंभीर और स्थायी समस्या के रूप में उभरता रहा है। सीमित वर्षा, अनियमित मानसून, भूजल के अत्यधिक दोहन तथा पारंपरिक जल-स्रोतों की उपेक्षा ने इस संकट को और गहरा किया है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य राजस्थान में जल संकट के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करना है। जल की कमी का सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन, पशुपालन, रोजगार और आय के स्रोतों पर पड़ता है, जिससे ग्रामीण जीवन की स्थिरता प्रभावित होती है। सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण फसलों की उत्पादकता घटती है, जिससे किसानों की आय में कमी और ऋणग्रस्तता की समस्या बढ़ती है। इसके अतिरिक्त, जल संकट के कारण पलायन की प्रवृत्ति भी तेज होती है, जिससे स्थानीय श्रम बाजार और सामाजिक संरचना प्रभावित होती है। यह अध्ययन विभिन्न द्वितीयक स्रोतों के आधार पर जल संकट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों को स्पष्ट करता है तथा सतत जल प्रबंधन, पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों के पुनर्जीवन और नीति-निर्माण की आवश्यकता पर बल देता है। |
| Keywords | जल संकट, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन, भूजल दोहन, राजस्थान, पलायन, सतत विकास, जल प्रबंधन |
| Discipline | Other |
| Published In | Volume 4, Issue 2, March-April 2026 |
| Published On | 2026-03-30 |

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