Advanced International Journal of Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2584-0487   Impact Factor: 9.11

An Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 4 Issue 3 May-June 2026 Submit your research before last 3 days of June to publish your research paper in the issue of May-June.

रमेश उपाध्याय की कहानियों में वृद्ध विमर्श: विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author(s) ओमप्रकाश शर्मा, डॉ. अनिल अग्रवाल
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध–लेख “रमेश उपाध्याय की कहानियों में वृद्ध विमर्श: विश्लेषणात्मक अध्ययन” में रमेश उपाध्याय के कथा–साहित्य में वृद्धावस्था की प्रस्तुति का गहन विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन वृद्ध विमर्श के सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य में यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि उनकी कहानियों में वृद्धावस्था को केवल जैविक क्षरण या शारीरिक दुर्बलता के रूप में नहीं, बल्कि एक जटिल सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक अवस्था के रूप में चित्रित किया गया है। रमेश उपाध्याय की कहानियों में वृद्ध पात्र आधुनिक समाज में उपेक्षा, अकेलेपन और संवादहीनता का सामना करते हुए दिखाई देते हैं। पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था के विघटन और उपभोक्तावादी मानसिकता के विस्तार के साथ वृद्ध व्यक्ति किस प्रकार परिवार और समाज में हाशिए पर पहुँच जाता है—यह यथार्थ उनकी कथाओं में सशक्त रूप से उभरता है। आर्थिक निर्भरता, निर्णय–प्रक्रिया से बहिष्कार और अनुभवों की अवहेलना वृद्ध पात्रों के आत्मसम्मान को गहराई से प्रभावित करती है। इसके साथ ही, उपाध्याय की कहानियाँ वृद्धावस्था को केवल करुणा का विषय न बनाकर एक सामाजिक प्रश्न के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जहाँ वृद्ध व्यक्ति की स्मृतियाँ, जीवन–अनुभव और मौन पीड़ा समकालीन समाज की संवेदनहीनता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। इस प्रकार, यह शोध निष्कर्ष रूप में प्रतिपादित करता है कि रमेश उपाध्याय का कथा–साहित्य वृद्ध विमर्श को मानवीय गरिमा, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक चेतना से जोड़ते हुए हिंदी कहानी को एक महत्वपूर्ण वैचारिक विस्तार प्रदान करता है।
Keywords रमेश उपाध्याय, वृद्ध विमर्श, वृद्धावस्था, हिंदी कहानी, सामाजिक उपेक्षा, पारिवारिक विघटन, अकेलापन
Discipline Other
Published In Volume 4, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-23

Share this