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Volume 4 Issue 4
July-August 2026
| Author(s) | गायत्री पाण्डिया |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है। समाज के कुशल और प्रभावी संचालन के लिए महिला–पुरुष दोनों की बराबर भागीदारी आवश्यक है। महिला की उन्नत एवं गौरवपूर्ण स्थिति एक मजबूत और सभ्य समाज को दर्शाती है। वास्तविकता यह है कि दुनिया का कोई भी देश, चाहे वह आर्थिक, राजनीतिक और सैनिक दृष्टि से कितना ही शक्तिशाली हो, लैंगिक समानता व महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य पूर्णतः हासिल नहीं कर सका है। जहाँ तक भारत की बात है, यहाँ प्राचीन काल से ही महिलाओं की स्थिति सम्मानजनक थी; मध्यकाल एवं इसके बाद स्वतंत्रता प्राप्ति तक महिलाओं की स्थिति खराब होती चली गई। मानवाधिकारों के लिए अनेक अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के बावजूद पुरुषों की तुलना में महिलाओं की शिक्षा, रोजगार व अन्य सामाजिक और आर्थिक संसाधनों तक पहुँच कम है। लैंगिक मुद्दों पर बढ़ी अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता के बाद भी अभी तक किसी भी देश ने वास्तविक लैंगिक समानता का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया है। पिछले तीन दशकों से महिलाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ी है। वर्तमान वैश्वीकरण के दौर में महिला के आर्थिक सशक्तिकरण का मुद्दा भी वैश्विक हो गया है। स्वयं सहायता समूह, और विशेष रूप से महिला-निर्देशित समूह, भागीदारी के माध्यम से सशक्तिकरण के लिए वर्तमान में क्रांतिकारी कार्यक्रम हैं। ये गरीबी उन्मूलन, मानव विकास, कौशल संवर्धन, नेतृत्व क्षमता व महिलाओं के पूर्ण सशक्तिकरण के लिए एक प्रभावी व उपयोगी रणनीति हैं। स्वयं सहायता समूह की अवधारणा “महिलाओं का, महिलाओं के द्वारा, महिलाओं के लिए” सशक्तिकरण के सिद्धांत पर आधारित है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता बढ़ाने, मौलिक मानवाधिकारों तक व्यापक पहुँच, पोषण स्तर में सुधार, जीवन स्तर में वृद्धि तथा बुनियादी स्वास्थ्य एवं शिक्षा हेतु स्वयं सहायता समूहों के गठन में वृद्धि हुई है। सशक्तिकरण एक बहुआयामी अवधारणा है और इसकी सफलता के लिए किसी भी समाज की पर्यावरणीय क्षमता का मजबूत होना आवश्यक है। महिला सशक्तिकरण को मूर्त आकार देने के लिए पाँच तत्व किसी भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं — आर्थिक भागीदारी, आर्थिक अवसर, राजनीतिक सशक्तिकरण, शिक्षा प्राप्ति हेतु उचित अवसर व वातावरण, तथा स्वास्थ्य और कल्याण। यद्यपि कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है, लेकिन वास्तविक सशक्तिकरण के लिए शिक्षा और आर्थिक क्षेत्रों में भागीदारी आवश्यक है। प्रस्तुत अध्ययन राजीविका द्वारा आयोजित सरस राज सखी मेले में सहभागी 65 महिला उत्तरदाताओं से संकलित प्राथमिक आँकड़ों के आधार पर मेलों/प्रदर्शनियों की महिला सशक्तिकरण में प्रभावशीलता का सांख्यिकीय परीक्षण प्रस्तुत करता है। |
| Keywords | स्वयं सहायता समूह, महिला सशक्तिकरण, महिला उद्यमिता, राजीविका, सखी मेला, माइक्रो-क्रेडिट, सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ, सांस्कृतिक बाधाएँ। |
| Discipline | Arts |
| Published In | Volume 4, Issue 4, July-August 2026 |
| Published On | 2026-08-13 |

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