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Volume 4 Issue 5
September-October 2026
| Author(s) | Akshay Chawala |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर आधुनिक भारत के प्रमुख समाज सुधारकों, विधिवेत्ताओं, अर्थशास्त्रियों एवं सामाजिक न्याय के विचारकों में से एक थे। उनका संपूर्ण जीवन जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता, सामाजिक असमानता तथा वंचित समुदायों के अधिकारों के संघर्ष को समर्पित रहा। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त जाति-आधारित ऊँच-नीच को केवल सामाजिक समस्या के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता, गरिमा और लोकतांत्रिक विकास में बाधा के रूप में देखा। उनका मानना था कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक हो सकती है, जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार, अवसर और सम्मान प्राप्त हों। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य डॉ. आंबेडकर के सामाजिक समानता संबंधी विचारों, आंदोलनों, शैक्षिक प्रयासों, संवैधानिक योगदान तथा महिला अधिकारों के समर्थन का ऐतिहासिक विश्लेषण करना है। अध्ययन में ऐतिहासिक एवं वर्णनात्मक पद्धति अपनाई गई है तथा प्राथमिक वैचारिक स्रोतों और सरकारी दस्तावेजों का उपयोग किया गया है। महाड़ सत्याग्रह, बहिष्कृत हितकारिणी सभा, जाति-व्यवस्था की आलोचना, भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी भूमिका तथा बौद्ध धर्म ग्रहण करने जैसी ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से उनके योगदान का मूल्यांकन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आंबेडकर ने सामाजिक समानता को केवल नैतिक आदर्श नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार, शैक्षिक सशक्तीकरण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक न्याय से जुड़ी व्यापक सामाजिक परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया। |
| Keywords | डॉ. बी. आर. आंबेडकर, सामाजिक समानता, सामाजिक न्याय, जाति-व्यवस्था, अस्पृश्यता, भारतीय संविधान, दलित आंदोलन, महिला सशक्तीकरण। |
| Discipline | Arts |
| Published In | Volume 4, Issue 5, September-October 2026 |
| Published On | 2026-10-28 |

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